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त्रिपुरा चाय

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त्रिपुरा चाय

त्रिपुरा चाय

देश के अन्य हिस्सों के विपरीत, जहां ब्रिटिश बागवानों ने बीड़ा उठाया था वहाँ त्रिपुरा में चाय की खेती पूरी तरह से भारतीय उद्यम द्वारा शुरू की गई थी। त्रिपुरा में वर्ष 1916 से चाय बागानों का इतिहास रहा है, जब त्रिपुरा की रियासत के पूर्व शासक महाराजा बीरेंद्र किशोर माणिक्य ने विशेष रूप से भारतीय रोपणकर्ताओं के लिए चाय की खेती के लिए व्यापक भूमि के पट्टे दिए थे। इस प्रकार, बीसवीं सदी की पहली तिमाही में कुछ भारतीय उद्यमियों के औद्योगिक प्रयासों एवं सक्रिय प्रोत्साहन के साथ त्रिपुरा में चाय की खेती शुरू हुई, इसके विपरीत देश के अन्य स्थानों के यह मुख्य रूप से यूरोपीय रोपणकर्ताओं द्वारा प्रचारित किया गया था।

रबड़ के बाद त्रिपुरा राज्य में चाय दूसरा सबसे व्वस्थित उद्योग है। पूरे साल राज्य में समान रूप से लगभग 2100 मिमी की वार्षिक वर्षा होती है एवं तापमान 10 डिग्री सेल्सियस से 35 डिग्री सेल्सियस तक रहता है। राज्य की मिट्टी आमतौर पर उर्वर है। अतः चाय की खेती के लिए राज्य की कृषि-जलवायु स्थिति उपयुक्त है। त्रिपुरा में मुख्य रूप से सीटीसी चाय का उत्पादन किया जाता है, जिसमें थोड़ी मात्रा में ग्रीन टी का उत्पादन भी किया जाता है। गुवाहाटी, असम में निकटतम नीलामी केंद्र है।