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नीलगिरी

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नीलगिरी

नीलगिरी चाय

ऊंचाई: समुद्र तल से 1000 से 2500 मीटर की ऊँचाई पर चाय उगाई जाती है।

वार्षिक वर्षा: 150 से 230 से.मि.

 तमिलनाडु, कर्नाटक और केरल राज्यों के माध्यम से सुंदर नीलगिरी पर्वत मालाएं, पशुचारण टोडा जनजाति और चाय बागानों का घर हैं जो चाय के सुगंधित कप का निर्माण करते हैं। नीलगिरि चाय में थोड़ी फ्रूटी, मिन्टी फ्लेवर होती है, शायद इसलिए कि इस क्षेत्र में ब्लू गम और नीलगिरी जैसे पेड़ हैं। और शायद चाय बागानों के करीब उत्पादित मसालें अपनी तेजता से मोहित कर देते हैं।   स्वाद और शरीर का संतुलित मिश्रण नीलगिरी चाय को 'ब्लेंडरों का सपना' बनाता है।  नीलगिरी हिल्स उर्फ ‘ब्लू माउंटेंस’ दक्षिण-पश्चिम और उत्तर-पूर्व मानसून दोनों के प्रभाव में आती है; एक कारण है कि यहां उगने वाली चाय की पत्तियां साल भर पक जाती हैं।  नीलगिरि रूढ़िवादी चाय एक पंजीकृत भौगोलिक संकेत (जीआई) है। इस क्षेत्र में चाय की ऑर्थोडॉक्स और सीटीसी दोनों किस्मों का निर्माण किया जाता है।

चाय की विशेषताएँ : एक स्वादिष्ट सुगंधित और उत्तम सुगंधित चाय, जिसमें नाजुक फूलों के उच्च स्वर एवं एक सुनहरी पीली लिकर है।  स्पष्टत तेज और उज्ज्वलता । ब्रिस्कनेस के एक अंडरकरंट के साथ डस्क फूलों के लिंटरिंग नोट्स।  मलाईदार अनुभुति। एक तनावपूर्ण दिन के लिए सही स्वादिष्ट चाय।